अक्षर एक,अर्थ अनेक
चेष्टा, गर्व,अभिमान

आज दीपिका और रविराज दोनों में सुबह से अनबन रही। दीपिका ने सुबह से आज किसीका कुछ न सुनने का जैसे प्रण किया था। मां को आज एक जरूरी काम के लिए छुट्टी के दिन भी कामपर जाना पडा। उसे यही बात अखर रही थी। कितना सारा काम था मां के साथ आज। बालों को धोने का दिन था। नेलपेंट निकालने का दिन था। दो कापियों के कवर्स फट चुके थे। नये कवर्स चढाने थे। सबसे बडी बात उसे पसंदीदा पनीरटिक्का मां के साथ बनाना था। हफ्तेभर मां से बात करने का वक्त ही नहीं मिलता। स्कूल की खबरें और मजेदार बातें मां को बतानी थी। पर उसके सपनोंपर पानी फेरा गया। 
ऊपरसे मां ने उसकी देखरेख के, उसे मनवाने के सारे काम रविराज को सौंपे थे।दोनों में उम्र का अंतर भी कितना था,महज तीन साल का। पर रविराज में एकदम बडे होने का एहसास जग गया था। उसने कुछ अपने चहेते कार्टून्स लगाए, पर दीपिका को वे पसंद ही नहीं आए।

दीपिका रुआंसी होकर बैठी ही थी कि दरवाजेपर किसी की आहट सुनायी दी। खुला दरवाजा पाकर उसे मां की डांट याद आयी,'मैं जब घरपर नहीं रहूंगी तब दरवाजा बंद करके ही अंदर बैठे रहो’। पता नहीं कौन आया है सोचती डर के मारे धीरे से बाहर के कमरे में आयी.किसी को नहीं पाया तो चिल्ला उठी,"भैया, मुझे डर लग रहा है, कौन है दरवाजे के बाहर, देखो तो सही। इतने में पडोस में नये-नये रहने आये लोगों की बेटी नीमा खिलखिलाते हुए कह गयी,'अरे, मैं तो तुम्हारी चेष्टा कर रही थी। इतने में रविराज भी दरवाजे पर कौन है, देखने आ पहुंचा था। नीमा के वाक्य से कुछ मजाक में, कुछ गुस्से में उसने कहा, "या तो पूरा वाक्य हिंदी में कहो या फिर मराठी में।"
नीमा यह सोचकर चल रही थी, कि वह बहुत सही हिंदी बोल रही है, क्योंकि उसकी बुआ के यहां रहकर आयी है। उसकी बुआ लखनौ में रहती है। रविराज ने उसे समझाया कि हिंदी का चेष्टा शब्द और मराठी का चेष्टा शब्द अलग-अलग अर्थवाले शब्द हैं।चेष्टा शब्द का हिंदी में अर्थ होता है प्रयत्न करना, प्रयास करना। मराठी के चेष्टा शब्द का अर्थ मराठी में होता है मजाक उडाना।
नीमा को यह रविराज का कहा पसंद नहीं आया। पर दीपिका को अपने भाई की जानकारी पर विश्वास था। ‘आओ नीमा, भैया हिंदी में स्कॉलर है। मां को बहुत अभिमान है भैया का। पर उसके इस वाक्य से नाराज रविराज से रहा नहीं गया। उसने कहा,"तुम भी? गलत शब्द का उपयोग कर रही हो।हिंदी में बात करते समय गर्व शब्द का उपयोग वहां होना चाहिए जहां तुम अभिमान कह रही हो।"नीमा और दीपिका ने परस्परों की ओर देखा और रविराज को अनदेखा किया। वैसे भी किसे पसंद है ना गलती बतानेवाला!
पर रविराज जो कह रहा था वह सही था। मराठी और हिंदी में कुछ ही ऐसे शब्द हैं जिनका प्रयोग होता है पर बडे भिन्न अर्थ के साथ।
-शुभदा जोशी