शब्दों का प्रयोग

दिंनाक: 10 Feb 2017 16:22:51

 

हिंदी भाषा : राष्ट्रभाषा

आज सुबह स्कूल था। पूरी शाम क्या करें प्रश्न सता रहा था ।बाबा की मीटिंग, आई का सेमिनार,अजोबा का किसी समवयस्क के साथ गांव होकर आना,आजी का किसी के यहां शादी थी तो मुहूर्त के पकवान बनाने जाना तय था। इस बीच दस वर्ष के सुमीत को क्या करना होगा किसी ने नहीं सोचा था। सभी को लगा कि शाम को ये मित्रों के साथ हमेशा के जैसा खेलेगा।

पर आज का दिन पता नहीं कैसा था। आज एक भी मित्र नहीं आया खेलने। सुमीत यूंहीं टहलता रहा घरके आसपास। इतने में पासवाली इमारत के ग्रंथालय में काम करनेवाली दीदी ने उसे रोका कहा," क्यों दोस्त?बाकी लोग कहां हैं आज?" सुमीत ने कहा,"पता नहीं, आज शायद कहीं गये हों बाहर"!दीदी ने कहा," चलो तो फिर मेरे साथ। जबतक कोई आए ग्रंथालय में मुझे भी अच्छा लगेगा तुम्हारे साथ बात करना।" ग्रंथालय को खोलकर दोनों अंदर आए।दीदी ने शुरुवाती काम निपटाकर बात शुरू करते हुए एक पुराने पसंदीदा ऍडवर्टाईज गाना बताया.‘एक तितली-अनेक तितलियां’।

बहुत सुन्दर शब्दरचना,सहज लय-ताल की मदद से एक-एक से अनेक बनते हैं यह बतानेवाला श्रवणीय गाना।

अचानक सुमीत को याद आया कि, आज उसे हिंदी का वर्कबुक मिला था।जो अभी उसके पास था। जाते जाते मित्र के यहां जाकर उसकी एक पुस्तक से कुछ अच्छे सुविचार निबंधलेखन के काम आयेंगे सोचकर लिखनेवाला था। उसने वर्कबुक बाहर निकालकर दीदी से पूछा मुझे ये हस्व ईकार और दीर्घ ईकार का फरक समझने ही नहीं आता। दीदी समझ गयी।उसने तुरंत तितलियोंवाले गाने की कविता की पुस्तक निकाली और सभी एकवचन-अनेकवचन वाले शब्दों की सूची बनाने कहा। कहा कि वही शब्द हों जो दीर्घ ईकारवाले हों।सुमीत ने उस गीत में से ही कुछ शब्द ढूंढे।दीदी ने उन लिखे शब्दों को देखा और पूछा बताओ इसमें एकवचन वाले और अनेकवचन वाले शब्दों को कैसे ढूंढ पाओगे?सुमीत ने झट से कहा जिन के सामने यों, एं.यां लगा हुआ हों वो अनेकवचनवाले शब्द।दीदी ने पूछा केवल यों,यां इन अक्षरों के अपने तो कोई अर्थ नहीं होते पर जब ये किसी शब्द के साथ जुडते हैं

शब्द को बदलते हैं। पर बता तो सुमीत कि और कोई बदलाव शब्द में तुम्हें नजर आया?तितली-तितलियां,गिलहरी-गिलहरियां इन शब्दों में सुमीत ने खोजा कि जब एकवचन है तो अंतिम अक्षर दीर्घ है और जब यां लगा तो वही ह्रस्वहो गया। उसे लगा दीदी ने बहुत सहजता से,आसानी से ह्र्स्व-दीर्घ शब्दों को समझाया। उसने यह बताया भी दीदी को। दीदी हंस दी और कहा ऐसा कुछ नहीं।आज तुम्हारा मन बहुत जल्दी एकाग्र हुआ, खेलने,मित्रों के साथ गप्पें लडाने में व्यस्त नहीं था।आज जो आसानी से हुआ,उसकी तुम्हें आदत डालनी पडेगी।जब भी जरूरत हो,मन से बातों को सुनना चाहिए। भाषा में व्याकरण की कुछ ही बातें होती हैं विशेष ध्यान देने की। आज ह्र्स्व-दीर्घ ईकार-इकार के बारे में हम ने जाना।

-शुभदा जोशी

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